STORYMIRROR

monika kakodia

Romance

3  

monika kakodia

Romance

शहर

शहर

1 min
191

मेरे शहर की ये बारिश और 

गुज़रे वक़्त की तेरी यादें

दोनों बेमौसम

दोनों बेमतलब

बरस जाती हैं।


चली आती हैं

भिगो देती हैं ज़िस्म मेरा

तर कर तेरी हैं रूह भी

ठहर जाती हूँ कहीं

सहम सी वहीं।


अपने ही ख़्यालों में उलझी

अपने ही सवालों में गुम

निखर आया है रंग बगीचे में

संवर आया है रूप

मेरे रुख़सारों पर।


खिड़की पर दस्तक देती 

ये बारिश 

धड़कनों को बढ़ाती 

तेरी यादें।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance