Priya Srivastava
Drama
होंगे बड़े बड़े आलोचक
हर किसी की जिंदगी में,
कहीं बॉस, कर्मचारी या सहपाठी,
लेकिन हमें जब भी
आलोचना का सामना किया,
सामने खड़ी थी हमारी माँ।
तेरी यादों की...
बदलती जिंदगी ...
खुद की तलाश
आखिर क्या है ...
ख्वाबों के सफ...
एक नई रोशनी क...
रंग का उत्सव
प्रेम गीत
नारी
विकलांगता
आंखों में नीर भी कह रहा ये शहर इतना झूठा क्यों है ? आंखों में नीर भी कह रहा ये शहर इतना झूठा क्यों है ?
पिता की आज्ञा मानना हमारी परम्परा है, इसी का पालन करते बालक नचिकेता यमराज के द्वार जाता है... और फिर... पिता की आज्ञा मानना हमारी परम्परा है, इसी का पालन करते बालक नचिकेता यमराज के द्व...
एक शिक्षक का काम छात्रों को अपने आप में जीवन शक्ति देखना सिखाना है, एक शिक्षक का काम छात्रों को अपने आप में जीवन शक्ति देखना सिखाना है,
पुरुषोत्तम श्री राम भी आये गिरधारी घनश्याम भी आये पुरुषोत्तम श्री राम भी आये गिरधारी घनश्याम भी आये
या खुदगर्ज बनके किया खुद से ही प्यार क्या मैं वहां गलत थी ? या खुदगर्ज बनके किया खुद से ही प्यार क्या मैं वहां गलत थी ?
आज लहू से मन की गाँठें, धीरे-से खोल रहा हूँ।। आज लहू से मन की गाँठें, धीरे-से खोल रहा हूँ।।
नृत्य तुम्हारी नाड़ी है, तुम्हारी धड़कन है, तुम्हारी श्वास है, यह आपके जीवन की लय है नृत्य तुम्हारी नाड़ी है, तुम्हारी धड़कन है, तुम्हारी श्वास है, यह आपके जीवन ...
सीधा सादा भोला भाला और स्वभाव से निराला रहता हूँ मैं जनम से धनबाद में। सीधा सादा भोला भाला और स्वभाव से निराला रहता हूँ मैं जनम से धनबाद में।
सहेज कर रखती हूँ जिदंगी की किताब के लम्हे, कलम से टंकित करती हूँ। सहेज कर रखती हूँ जिदंगी की किताब के लम्हे, कलम से टंकित करती हूँ।
जा एकांत में छोड़ मुझे अभी चला जा, जा एकांत में छोड़ मुझे अभी चला जा।। जा एकांत में छोड़ मुझे अभी चला जा, जा एकांत में छोड़ मुझे अभी चला जा।।
वो नुक्कड़ वाले प्यार का अपना ही मजा होता है। वो नुक्कड़ वाले प्यार का अपना ही मजा होता है।
और यही सोच रही है कि कितना कुछ पकाया मैंने इस आंच में। और यही सोच रही है कि कितना कुछ पकाया मैंने इस आंच में।
कभी अपने घर में और कभी बेटे बहू के घर में। कभी अपने घर में और कभी बेटे बहू के घर में।
बच्चों को अच्छा इन्सान बनाऐंगे। हर परिस्थिति का सामना करना सिखायेंगे। बच्चों को अच्छा इन्सान बनाऐंगे। हर परिस्थिति का सामना करना सिखायेंगे।
यद्यपि गाँव की शीतलता बहुत भाती है, पर शिथिलता यहाँ की अखरती है, यद्यपि गाँव की शीतलता बहुत भाती है, पर शिथिलता यहाँ की अखरती है,
बेटे की जिद थी की शादी करुंगा ताे इसी लडकी से... माॅं ने भी हां में भर दी, बेटे की खुशी के लिए... ले... बेटे की जिद थी की शादी करुंगा ताे इसी लडकी से... माॅं ने भी हां में भर दी, बेटे ...
आखिर तुमने भी नारायण अपनी भू देवी को पहचान कर की ही चुना होगा आखिर तुमने भी नारायण अपनी भू देवी को पहचान कर की ही चुना होगा
कभी समय मिले तो, घड़ी दो घड़ी, बेटा, मिलने आते रहना। कभी समय मिले तो, घड़ी दो घड़ी, बेटा, मिलने आते रहना।
इस बिना शस्त्र के युद्ध में कितने अपने चले गए इस बिना शस्त्र के युद्ध में कितने अपने चले गए
नरसंहार का मतलब सिर्फ सामूहिक हत्या नहीं है, विनाश के स्तर तक, नरसंहार का मतलब सिर्फ सामूहिक हत्या नहीं है, विनाश के स्तर तक,