एहसास तक ना हुआ
एहसास तक ना हुआ
जो मेरा गुरुर था
वो गुरुर टूट गया
रहती थी जिस शहर में
वो शहर छूट गया
करती थी प्यार जिससे
उस प्यार का साथ छूट गया
वक्त का खेल है या
नसीब मेरा खराब है
जो भी शख्स मिला
ऐसा ही मिला
मै अपना समझती गई
वो बेगानो सा समझता रहा
पलभर में ही छोड़ गया
जिस खुशी की तलाश थी मुझे
उसका तो एहसास तक ना हुआ,,,।।

