STORYMIRROR

Sunil Kumar

Abstract

3  

Sunil Kumar

Abstract

दर्पण

दर्पण

1 min
211

दर्पण में मुखड़ा देख कर 

हर कोई इतराता है 

मन में किसी के क्या है 

ये दर्पण कहां दिखाता है।


जो चाहते हम देखना 

बस वही तो ये दिखाता है

मन के भीतर हमारे

कहां ये झांक पाता है।


सच्ची सुंदरता तो होती है मन की

पर इंसान तन की 

सुंदरता पर इतराता है।


माना दर्पण कभी झूठ नहीं बोलता

पर दिल की बात भी कहां ये बताता है

दर्पण में मुखड़ा देखकर 

हर कोई इतराता है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract