STORYMIRROR

Rajit ram Ranjan

Romance

4  

Rajit ram Ranjan

Romance

दर्द के पहलुओं में...!

दर्द के पहलुओं में...!

1 min
278

किससे बयां करें,

हम दिल कि दास्ताँ.... 

कौन समझेगा, 

यहाँ दर्द मेरा.... 

अब तो ज़िन्दगी, 

काँटों सी चुभने लगी हैं....

फूलों की महक़ भी, 

फ़ीकी-फ़ीकी सी लगने लगी हैं.... 

इस दर्द के पहलुओं में, 

एक पल भी जीना, 

दूभर सा हो गया है....  

ऐसे वक़्त में ख़ुद को, 

कैसे संभाला जा सके, 

यही सोच-सोच कर, 

आँखें भरी जा रही हैं.... 

कोई साथी मिल जाये किसी 

मोड़ पर, 

जो सहारा दे सके डगमगाते इन 

पैरों को फ़िर से....!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance