Priti Yawalikar
Drama Classics
बेशुमार कलाओं से दोस्ती हो कर
ख़ुदको खो दिया है तुमने कहीं,
की बेहद उलझी सी है तू,
तुझे अपनें हर कला से सुलझा दूं
जैसें एक अरसां कविताओं से
मुलाक़ात नहीं हुईं की,
दुनियां के हर ख़ूबसूरत अल्फाजों
से तुझे मिला दूं !
ए जिंदगी
दोस्ती
तलाश ए जिंदगी
दास्ताँ ए जिं...
उँचे गगन में उड़ान भरते हैं मौसम की तरह बदल जाते हैं। यह तो हर साल होता है पतझड़ के पंछी... उँचे गगन में उड़ान भरते हैं मौसम की तरह बदल जाते हैं। यह तो हर साल होत...
कि चले जाओ वही जहाँ ये रूह-ए-एहसास, अब रहती नहीं। कि चले जाओ वही जहाँ ये रूह-ए-एहसास, अब रहती नहीं।
इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी। इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी।
लंका में अग्निकांड भी मैं था लंका में अग्निकांड भी मैं था
छंदमुक्त कविता...! छंदमुक्त कविता...!
किसी को प्रेम लिप्त करा दे, और परलोक भिजवा देता पैसा। किसी को प्रेम लिप्त करा दे, और परलोक भिजवा देता पैसा।
अगर तुम्हारे मन में आये कभी कोई प्रश्न तो पूछना इस जहां के लोगों से. अगर तुम्हारे मन में आये कभी कोई प्रश्न तो पूछना इस जहां के लोगों से.
इस बार सबको अनदेखा कर उनका हाथ थामना जिनको बस अपनों की तलाश है इस बार सबको अनदेखा कर उनका हाथ थामना जिनको बस अपनों की तलाश है
हर बार दर्द सहकर मैंने तो यही सीखा, "मौत तू एक ख़ूबसूरत कविता है जिसे मैं रोज गुनगुनाऊँगी जब तक तू ... हर बार दर्द सहकर मैंने तो यही सीखा, "मौत तू एक ख़ूबसूरत कविता है जिसे मैं रोज ग...
कई स्वर्णिम चतुर्भुज और बनाने, हाँ, अटल तुम फिर से आना...! कई स्वर्णिम चतुर्भुज और बनाने, हाँ, अटल तुम फिर से आना...!
ना जाने क्या है जो मुझे जाने नहीं देता, एक एहसास है जो तुमसे दूर होने नहीं देता। ना जाने क्या है जो मुझे जाने नहीं देता, एक एहसास है जो तुमसे दूर होने नहीं द...
यातनाएं सही तन और मन पर गहरी पीड़ा सही, यातनाएं सही तन और मन पर गहरी पीड़ा सही,
चाहे कितना घनघोर अँधेरा छाया है कर्मवीरों ने अमावस को पूनम बनाया है। चाहे कितना घनघोर अँधेरा छाया है कर्मवीरों ने अमावस को पूनम बनाया है।
मैं तुझे हार कर मेरी ऐ दोस्त, फिर कहीं दूर, बहुत दूर चला जाऊँगा...! मैं तुझे हार कर मेरी ऐ दोस्त, फिर कहीं दूर, बहुत दूर चला जाऊँगा...!
अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर ! अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर !
क्यूँकि वो नाजायज़ था क्यूँकि वो नाजायज़ था
इस द्रौपदी की गिरधारी तक काहे ना पहुंचे पुकार है, इस द्रौपदी की गिरधारी तक काहे ना पहुंचे पुकार है,
खामोशी, कहने को तो महज अल्फ़ाज़ है, लेकिन इसका अर्थ कुछ और है, खुद में इतने सारे अल्फाजों को समेटे ह... खामोशी, कहने को तो महज अल्फ़ाज़ है, लेकिन इसका अर्थ कुछ और है, खुद में इतने सारे...
ऐ मेरे मुल्क़ के अब फिर मिलेगी आज़ादी, ऐ मेरे मुल्क़ न कहना पड़े रोता क्यों है। ऐ मेरे मुल्क़ के अब फिर मिलेगी आज़ादी, ऐ मेरे मुल्क़ न कहना पड़े रोता क्यों है।
बड़ी भाती थी मुझे माँ और बच्चों की गतिविधियां जैसे मेरी जुड़ चुकी थी उनसे रिश्तेदारियां बड़ी भाती थी मुझे माँ और बच्चों की गतिविधियां जैसे मेरी जुड़ चुकी थी उनसे रिश्त...