दोस्ती की परिभाषा
दोस्ती की परिभाषा
खून का रिश्ता नहीं फिर भी दिल के पास
हर सुख दुख में खड़ा रहे जो तुम्हारे साथ
बिन कहे ही समझ सके हर तुम्हारी बात
मुस्कुराहट के पीछे क्या छुपा है राज़
आँखो की नमी में छलक रहा क्यों दर्द
अनकहे लफ्जों का भी समझ सके जो अर्थ
जिसके साथ होने से दुख हो जाता आधा
खुशियां दुगुनी हो जाएँ यही दोस्ती की परिभाषा
न औपचारिकता, न कोई आवरण, न मन में हो दुराव छिपाव
न हैसियत, न आडम्बर, न प्रतिष्ठा का भेदभाव
दोस्त हों सच्चे मन के, बेशक चाहें हों कमतर
दुविधा-शंका में देते सलाह वो अभिभावक बनकर
ऐसे दोस्तों से अक्सर कुछ लोग भी जलते हैं
बडी मुश्किल से मगर दुनिया में दोस्त मिलते हैं।
