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Poonam Arora

Inspirational

4.5  

Poonam Arora

Inspirational

दीवार में एक खिड़की रहती थी

दीवार में एक खिड़की रहती थी

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दीवार में एक खिड़की रहती थी
मंद सुगंध मारुत लहरियों में गहती थी
चौखट में बैठे परिंदों से किया करती थी बात
उड़ती तितलियों को भर भर लेती अंक गात
चांदनी की रश्मियों का झिलमिल ओढ़ती परिधान
दिनकर के प्रखर ताप से नित होती ऊर्जावान
गुन गुन रूनझुन खग विहग रहते थे पट पे झूलते
छन-छन पवन के झोंके रहते गुंजन करते
मेह वृष्टि के  जलकणों से तिरोहित स्नात गात
धूप बैठी सुस्ताती उसकी देहरी की ताक
धीरे-धीरे खिड़की में नमी कुछ रसने लगी
दरारों में फूट कर नित खिड़की गलने लगी
दीमक लग गया खिड़की में, झर जय सी झरने लगी

फिर आत्मबोध, आत्मविश्वास की ऊर्जस्विता ने भर दिया दीमक लगी दरार को,
नव ऊर्जा की उजली, तेजोमय रश्मियों ने खिड़की को नवजीवन दिया फिर से।

पूनम अरोड़ा



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