प्रेम का असली रूप पहचानो
प्रेम का असली रूप पहचानो
"कभी श्रद्धा के रूप में तुम फ्रिज में टुकड़े- टुकड़े कर रखी जाओगी !कभी तुम धर्मांतरण का मुहरा बनकर आंतकी संगठन को सौंपी जाओगी !
कभी साक्षी बनकर बर्बरता से कुचली जाओगी!
तो कभी तेजाब से, तो कभी जलाकर मारी जाओगी!
बेटियों तुमसे विनती है तुम प्रेम के पर्दे को ज़रा हटाकर उसके वीभत्स रूप को पहचानना सीखो ।
ये दानव - दरिन्दे तुम्हारे प्रेम के पात्र नहीं !
आख़िर तुम कबतक खुद का बलि देती जाओगी?
हे नारी शक्ति! तुम जागो । जागो जागो।
प्रेम का असली रूप पहचानों।।
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