STORYMIRROR

Nitesh Prasad

Inspirational

4  

Nitesh Prasad

Inspirational

कितना अकेला हूँ मैं

कितना अकेला हूँ मैं

1 min
221

कितना अकेला हूँ मैं अभिमन्यु सा

जीवन युद्ध में विपत्तियों से घिरा

संघर्ष मेरा निरंतर जारी है


हौसला रथ के पहिये सा भारी है

माना मैंने सीखा केवल चक्रव्युह में करना प्रवेश

मैं मतलबी नहीं, ना मेरे मन है कोई द्वेष


अकेला लडूंगा, अकेला ही सहूँगा, सारे मतलबी वार

हार न मानूंगा, चाहें किस्मत बंद करे सारे द्वार

टूट कर बिखर नहीं सकता


मैं तो हूँ फूल की पंखुड़ी,

सुगंध अपनी छोड़ नहीं सकता।


ಈ ವಿಷಯವನ್ನು ರೇಟ್ ಮಾಡಿ
ಲಾಗ್ ಇನ್ ಮಾಡಿ

Similar hindi poem from Inspirational