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दीवार में एक खिड़की रहती थी मंद सुगंध मारुत लहरियों में गहती थी चौखट में बैठे परिंदों से किया करती थ... दीवार में एक खिड़की रहती थी मंद सुगंध मारुत लहरियों में गहती थी चौखट में बैठे पर...
घेर लेने को जब भी बलाएं आ गईं ढाल बनकर मां की दुआएं आ गईं। घेर लेने को जब भी बलाएं आ गईं ढाल बनकर मां की दुआएं आ गईं।
गोद में मां के रखकर सिर सो जाते हैं निश्चिंत गोद में मां के रखकर सिर सो जाते हैं निश्चिंत
कभी कुछ कह जाती हूँ कभी चुप रह जाती हूँ। कभी कुछ कह जाती हूँ कभी चुप रह जाती हूँ।
कुछ देहरी में झड़ जाते पायदान , कालीन के साथ में कुछ देहरी में झड़ जाते पायदान , कालीन के साथ में
खाओ,पाओ,निरोग रहो, रचनाएं लिखो स्टोरी मिरर में। खाओ,पाओ,निरोग रहो, रचनाएं लिखो स्टोरी मिरर में।
एक गर्म चाय की प्याला हो कोई उसको पिलाने वाला हो एक गर्म चाय की प्याला हो कोई उसको पिलाने वाला हो
कोहरे की धुंध में घुलती जा रही संवेगों की नमी की पिघलाहट थी। कोहरे की धुंध में घुलती जा रही संवेगों की नमी की पिघलाहट थी।
यही सच है यही यथार्थ और यही बस अपना सपना है। यही सच है यही यथार्थ और यही बस अपना सपना है।
वक्त बदलता अपना वक्त, सब वक्त वक्त की बात। वक्त बदलता अपना वक्त, सब वक्त वक्त की बात।