दूसरों को आईना दिखाते हैं लोग
खुद को मुखौटे में छुपाते हैं लोग
पूनम अरोड़ा
दूसरों को आईना दिखाते हैं लोग
खुद को मुखौटे में छुपाते हैं लोग
पूनम अरोड़ा
दूसरों को आईना दिखाते हैं लोग
खुद को मुखौटे में छुपाते हैं लोग
पूनम अरोड़ा
दूसरों को आईना दिखाते हैं लोग
खुद को मुखौटे में छुपाते हैं लोग
पूनम अरोड़ा
चिंता और चिंतन में उतना ही फर्क है जितना सिगरेट और हवन के धुंए में --
पूनम अरोड़ा
जो मिट्टी में मैले होते वो भी मिट्टी में मिलते हैं
जो मिट्टी को मैल समझते वो भी मिट्टी में मिलते हैं
पूनम अरोड़ा
हर शख्स आज शर्मिन्दा है
क्या मानवता आज भी जिन्दा है?
मणिपुर घटना
पूनम अरोड़ा