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Priyabrata Mohanty

Abstract Children Stories Tragedy


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Priyabrata Mohanty

Abstract Children Stories Tragedy


दिव्यांग

दिव्यांग

1 min 282 1 min 282

जीने के लिए संघर्षरत हूं,

किस्मत का मारा, शरीर है अधूरा,


तकलीफ क्या चीज कैसे समझाऊं,

दिव्यांग हूं मैं अंग नहीं पूरा !!


भगवान ने हम सब को बनाया,

फिर क्यों अंतर इतना,


पैरालंपिक में स्वर्ण जीत के भी,

न होती हमारे संवर्धन !!


दर्द की सागर है इस दिल में,

पीड़ा का लहर सदा रहेगा,


मेरे लाचारी पर आज जो हँस रहा है,

कल उस पर भी कोई और हँसेगा !!


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