दिल
दिल
दिल है कि मानता ही नहीं
जितना समझाने का कोशिश
उतनी और ज्यादा उलझन
खुदको हमेशा घिरा पाऊँ।
तुमसे प्यार क्या हुआ
जिंदगी,अर्थ ही बदल गया
अब ना कहीं मन लगता
ना कुछ अच्छा लगता ।
विचारों में खोए रहना
अपनी ही कल्पना
अपने ही सवाल- जवाब
जिंदगी हो गई नाकाम ।
पता नहीं यह हालत
किस तरीके हो गई
बेचैनी का आलम
कुछ इस कदर छाया।
बिना मिले दिल न लगे
मिले तो क्या कहें ये सोचे
दिल्लगी अब बंदगी हो गई
हम तो इस जहाँ से गए।
कोई पागल कहे,कोई दीवाना
कैसे समझाऊँ ये दिल का मामला
दिन -चैन, रात-नींद गई जनाब
बस केवल अब हर दिल देखे ख्वाब।

