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Saleha Memon

Abstract Romance Fantasy

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Saleha Memon

Abstract Romance Fantasy

दिल फिर भी उनके लिए दरवेश था

दिल फिर भी उनके लिए दरवेश था

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ना दिन हुआ 

ना शाम ढली

मसलसल एक सहमी सी रात थी।

ना स्याही निकली

ना कागज़ मिले

अल्फ़ाज़ फिर भी एक किताब में छुपे थे।

ना सर्द हुई

ना गर्म हुए

जज्बातों का ही तो एक मौसम था।


ना देखा कभी

ना बात हुई

आरज़ू तो थी एक मुलाक़ात की।

ना यादें कोई

ना ख्वाब बुने

जेहन तो फिर बेख़्वाब ही था ।

ना चिट्ठी

ना कोई ख़त लिखे

अर्ज़ तो थी एक अवराक ( पन्ने) की।


ना खबर कोई 

ना दस्तक दिए

मर्ज तो थी उनके दीदार की ।

ना हर्फ मिले 

ना सफ़ (पंक्ति)बनी

कलम तो फिर भी मसरूफ थी।

ना राह कोई

ना सफर किया

सर्दियों से फिर भी मुसाफ़िर थे।


ना साथ 

ना कोई हाथ

मोहब्बत फिर भी जाविदां थी।

ना जनता

ना कोई जांच

सियासत तो फिर भी उनके नाम की थी।  

ना प्यार हुआ

ना इजहार किया

दिल फिर भी उनके लिए दरवेश (फ़कीर) था।



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