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Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy

दिल में जहर

दिल में जहर

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दिल में लोगो के जहर भरे पड़े है

मुँह से लोग गुड़ से ज़्यादा खरे है

जितना ज़्यादा बोलते वो अच्छा,

समझ पीछे वो छुरी लिये खड़े है


वो ही ज़्यादा कड़ुआ बोलते है

जिनके मन अच्छाई के घड़े है

दिल में लोगो के जहर भरे पड़े है

वो लोग हंसकर आंसू छिपाते है

जिसके भीतर आंसू भरे पड़े है


सांप को भले तू पास आने दे,

मीठी छुरीवालो को तू दूर जाने दे,

ज्यादा मिठाई से ही आजकल,

लोग सुगर के रोगी हो पड़े है


जहर से आज लोग नही मरते है

मीठे से आज लोगो के दिलजले है

मीठी छुरी के आगे,

तोप, मिसाइल भी फ़ीके पड़े है

दिल में लोगो के जहर भरे पड़े है


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