Amandeep Singh
Tragedy
दिल खुदा से यूँ तुझे क्यों माँगता है
और भी तो है हसीं जब जानता है
इस इश्क़ के मर्ज़ से बेज़ार है दिल
हाँ यही सच है अमन ये मानता है
मैं
रात
कुछ नहीं है
रोटी मेरे बिन...
ज़िंदगी - ग़ज़ल
खत
दिल खुदा से
खुद पेंशन भत्ता निगल दूसरों को देते हैं ज्ञान। खुद पेंशन भत्ता निगल दूसरों को देते हैं ज्ञान।
मैंने भी मोहब्बत की थी पर मुकम्मल नहीं हो पाई। मैंने भी मोहब्बत की थी पर मुकम्मल नहीं हो पाई।
हिन्दी की गरिमा को क्यों आज हम खोते जा रहे हैं! हिन्दी की गरिमा को क्यों आज हम खोते जा रहे हैं!
मैं मिली उससे एक दोस्त की तरह और वो तो दुनियादारी का दिखावा करती रही मैं मिली उससे एक दोस्त की तरह और वो तो दुनियादारी का दिखावा करती रही
आपके कर्मों को 'अमरत्व" देंगे ये ज़माने वाले आपके कर्मों को 'अमरत्व" देंगे ये ज़माने वाले
पवित्र नदियों के निर्मल जल को बना गया जहरीला पानी! पवित्र नदियों के निर्मल जल को बना गया जहरीला पानी!
उनको तो जाना था सबको छोड़ चली गई। उनको तो जाना था सबको छोड़ चली गई।
इक अरसा बीत गया अब भूल जाओ, ऑंखों से ना कहो, न अधरों पर लाओ। इक अरसा बीत गया अब भूल जाओ, ऑंखों से ना कहो, न अधरों पर लाओ।
सब तम तीली से जला रहे, दीप आज ईश्वर को समर्पित कर, जीवन जहाज सब तम तीली से जला रहे, दीप आज ईश्वर को समर्पित कर, जीवन जहाज
क्या मुमकिन है बदलना इस जहां को तड़पती धरती ,,,जलते आसमा को,,, क्या मुमकिन है बदलना इस जहां को तड़पती धरती ,,,जलते आसमा को,,,
वक्त के हाथों हम सब कठपुतलियाँ हैं। वक्त के हाथों हम सब कठपुतलियाँ हैं।
बड़ी मशक्कत के बाद तो हिंदी राजभाषा ही बन सकी। बड़ी मशक्कत के बाद तो हिंदी राजभाषा ही बन सकी।
कुछ खाली और कुछ आधे भरे चाय के गिलास, गिलास के उस पार झांकते अखबार के कुछ पन्ने। कुछ खाली और कुछ आधे भरे चाय के गिलास, गिलास के उस पार झांकते अखबार के कुछ पन्...
तू है तेरे प्यार की मूरत जानेमन, तेरे प्यार की पूजा करना चाहता हूं। तू है तेरे प्यार की मूरत जानेमन, तेरे प्यार की पूजा करना चाहता हूं।
तुम हो गलत जानती हूं पर अब झगड़ने का मन नहीं करता। तुम हो गलत जानती हूं पर अब झगड़ने का मन नहीं करता।
कहाँ मुमकिन है अकेले जंगल में रहना कहाँ मुमकिन है अकेले जंगल में रहना
संस्कृति की सजीवता को बचाएं, हिंदी भाषा यह हमारा गर्व का पहचान । संस्कृति की सजीवता को बचाएं, हिंदी भाषा यह हमारा गर्व का पहचान ।
हिंद भाल पर शोभित बिंदी, गौरव खो रही अपनी हिन्दी। हिंद भाल पर शोभित बिंदी, गौरव खो रही अपनी हिन्दी।
तेरे गेसुओं की छांव में गुजारी कितनी शाम सुहानी। तेरे गेसुओं की छांव में गुजारी कितनी शाम सुहानी।
जिसे ज़िन्दगी नसीब होती है, एक दिन उसे इस दुनिया से रुखसत होना ही पड़ता है... जिसे ज़िन्दगी नसीब होती है, एक दिन उसे इस दुनिया से रुखसत होना ही पड़ता है.....