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Amandeep Singh

Others

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Amandeep Singh

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खत

खत

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ख़त भेजा उसने  क़ासिद के हाथों मुझको

शब भर  खाबों में  देखा करते हैं तुझको।


दिल में तेरी  यादें   लब  पे तेरी  बातें

यारा तेरे बिन  भाता ना  कोई मुझको।


हर इक दर पर सजदा करना है अब आदत

माँगा जब कुछ रब से  माँगा हमने तुझको।


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