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Jayantee Khare

Tragedy

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Jayantee Khare

Tragedy

दिल जाऱ हुए सुनकर

दिल जाऱ हुए सुनकर

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दिल ज़ार हुए सुनकर ऐसे ये फ़साने हैं

कलियों को कुचलते हैं फूलों पे निशाने हैं


महफ़ूज़ नहीं बुलबुल वहशी हर दरिन्दा है

मर्दाने मरे कब के जिंदा ही हैवाने है


अब किसको करें सज़दा सोई है ख़ुदाई भी

तेरे दर पे लुटे मासूम बेहतर मैख़ाने हैं


राहों में भेड़िये हैं क़ातिल तो बसे घर में

जाएं तो कहाँ जाएं बस कब्र ठिकाने हैं।


मौतों पे सियासत है कौड़ी की है अस्मत

अब दूर नही 'जुगनू' जौहर के ज़माने हैं।


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