STORYMIRROR

Kishan Negi

Romance

4  

Kishan Negi

Romance

दिल ही तो है (लाल रंग)

दिल ही तो है (लाल रंग)

1 min
353

बात ख़ास नहीं बस इतनी-सी है

ये दिल अब चाहने लगा है तुमको

तुम यक़ीन ना करो कोई बात नहीं

पलकों में सजाने लगा है तुमको 


मैं ग़र मान भी जाऊँ तो क्या

कमबख्त दिल है कि मानता नहीं है 

समझाया तो था मगर अक्खड़ है

दिल्लगी का अंजाम जानता नहीं है


भाषा प्यार की भला ये क्या जाने

देख इसका जुनून अब डरने लगी हूँ

दिल तो दिल है दिल का क्या करूं

सच कहूँ तुम पर मैं भी मरने लगी हूँ


किताबों से सुना था ज़िक्र प्यार का

अहसास हुआ तुमसे मिलने के बाद 

जैसे उदास उपवन भी महकता है 

बसंत ऋतु में फूल खिलने के बाद 


जब से नज़र भर देखा है तुमको

रूह में इक टीस-सी उभर आई है

ये ख़्वाब नहीं हक़ीक़त है जब से

आंखों में तस्वीर तुम्हारी उतर आई है.


 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance