दिल ही तो है (लाल रंग)
दिल ही तो है (लाल रंग)
बात ख़ास नहीं बस इतनी-सी है
ये दिल अब चाहने लगा है तुमको
तुम यक़ीन ना करो कोई बात नहीं
पलकों में सजाने लगा है तुमको
मैं ग़र मान भी जाऊँ तो क्या
कमबख्त दिल है कि मानता नहीं है
समझाया तो था मगर अक्खड़ है
दिल्लगी का अंजाम जानता नहीं है
भाषा प्यार की भला ये क्या जाने
देख इसका जुनून अब डरने लगी हूँ
दिल तो दिल है दिल का क्या करूं
सच कहूँ तुम पर मैं भी मरने लगी हूँ
किताबों से सुना था ज़िक्र प्यार का
अहसास हुआ तुमसे मिलने के बाद
जैसे उदास उपवन भी महकता है
बसंत ऋतु में फूल खिलने के बाद
जब से नज़र भर देखा है तुमको
रूह में इक टीस-सी उभर आई है
ये ख़्वाब नहीं हक़ीक़त है जब से
आंखों में तस्वीर तुम्हारी उतर आई है.

