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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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दीपक

दीपक

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तूफान कई उठे

 आंधियां भी खूब चलीं

 मैं थी कि दीपक बचाती रही

 लेकिन दीपक ने ही घर बचा लिया

 घर का सूरज बन,

 घर रोशन कर दिया।


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