STORYMIRROR

Rekha Shukla

Drama

2  

Rekha Shukla

Drama

डाकिया

डाकिया

1 min
135

शब्द ज्योति अखंड फोन डाकिया 

बिछड़ के तुमसे मिलना है 

मिट के फिर हमें बनना है

जलाते रहे हमसे हमें

तो ज्योत फिर भी बनना है 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama