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Kahkashan Danish

Tragedy

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Kahkashan Danish

Tragedy

दौर ए वबा

दौर ए वबा

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दौर- ए- वबा डर का कैसा साया है,

दिल मेरा भर आया है।


चारो ओर तबाही है,

दौर वबा का आया है।


भूख जान की दुश्मन है,

बीमारी इक उलझन है,


मौत बनी है सन्नाटा,

ख़तरे में क्यों जन-जन है।


उठने को तैयार हुआ

अब जितना भी सरमाया है,


चारो ओर तबाही है,

दौर वबा का आया है।


लोग घरों से निकलें हैं,

पत्थर दिल भी पिघलें हैं,


खाना- पीना दूभर है,

हाल सभी के बदले हैं।


बीमारी क्या खायेगी,

भूख ने उनको खाया है,


चारो ओर तबाही है,

दौर वबा का आया है।


सबको रहना घर पर है,

भटका ग़ुरबा दर- दर है,


कभी नहीं जो पहले आया,

देखा ऐसा मंज़र है।


जुदा हुए सब मर्ज़ी से,

इंसा भी शरमाया है,


चारो ओर तबाही है,

दौर वबा का आया है।


बंद मंदिर के द्वारे हैं,

सजदे में घर सारे हैं।


रब का घर केवल दिल है,

कुदरत से सब हारे हैं।


अपने ग़ज़ब तरीक़े से,

कुदरत ने समझाया है।


चारो ओर तबाही है,

दौर वबा का आया है।


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