दौर दौर की बात
दौर दौर की बात
अक्सर कहने की बात है
कल इसका दौर था
आज उसका दौर है
और
यह तो दौर-दौर की बात है।
अपने दौर में उसका शबाब देखने लायक था
पांव ज़मीन पर टिकते नहीं थे
ख़ुद को उरूज पर ऐसे समझा
कि
ज़मीं से जुड़े रहने का सबब ही भूला था।
जब हमारा दौर था
हम भी किसे से कम नहीं थे
ज़मीं पर जुड़े रहने के बावजूद
तब
हम भी हवा में उड़ते रहते थे।
बीते दौर की नाखुश यादें
भूलाने में बेहतरी मान कर
सुनहरे दौर की खुशनुमा यादें
संजोए
फिर बदलते दौर की बेबसी क्यों ?
दौर -दौर की बात तो होती रहेगी
यादों में ढलता दौर हो
निष्क्रियता का दौर हो
या
व्यस्तता का दौर हो।
वक़्त तो बीतता जाएगा
हर हाल में चलायमान है
ज़िन्दगी जीते रहने का दौर
जो सांसों के साथ चलता रहेगा।
