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Avneet kaur

Drama Romance Tragedy


4.9  

Avneet kaur

Drama Romance Tragedy


दास्ताँ

दास्ताँ

1 min 351 1 min 351

मिजाज यूं इस कदर है कि

मुहब्बत करते भी हैं और बता भी नहीं रहें

निशाने ए सजदा करते है उनको

बस अपने लफ्जो में बता नहीं रहें।


इश्क की किताब के हर पन्ने में

उनका नाम लिखा हैं

इस गलती के हम उनको गुनहगार बना नहीं रहें

फासला रख कर हम उनसे कोई ताल्लुक नहीं रखना चाहते

एहमियत देकर भी हम उन्हें बता नहीं रहें


हर बरसात की बूंद में आप का एहसास लगा रहता हैं

बस हम इस एहसास को बता नहीं रहें

इस दुनिया के सामने तन्हा से बन कर रह गए हैं

बस हर एक को अपने दिल का हाल सुना नहीं रहें।


न जाने लोग हमें शायर क्यों कहते हैं

हम तो वो लिखते हैं जो आप को बता नहीं रहें

सुकून तो मिल जाता है आपको देखकर 

बस हम अपने अधूरे दिल की दास्ताँ सुना नहीं रहें।


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