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usha shukla

Classics

4  

usha shukla

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चुटकी में भरा रंग कहां है?

चुटकी में भरा रंग कहां है?

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चारों ओर है रंगों की फुहार,

 मगर वो कहां है ?

वो हथेली पर रखा,

 चुटकी में भरा ,

रंग कहां है ?

जब तक प्रियतम ना लगाए रंग,

 तब तक रहे कोरे-कोरे,

 सबसे छिपकर प्रतीक्षा करे,

 वो प्रिये कहां है?

 पहुंचे सारे रंग वहां तक,

 छू के निकले उनको जो हवा ,

वो बयार कहां है ?

भेजे हैं सारे रंग,

 प्रेम के नीर में भिगोकर,

 पहुंचे उस सांवरिया के पास ,

वह जहां है।।



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