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Alok MS

Classics Fantasy

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Alok MS

Classics Fantasy

चलो फिर वो शाम तलाशते हैं

चलो फिर वो शाम तलाशते हैं

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चलो आओ फिर वो शाम तलाशते हैं,

बातो से भरे वो जाम तलाशते हैं,

तलाशते है उन लम्हो को..


..जिनमें बेतकल्लुफी आम होती थी,

तराशते है उन रिश्तों को..

..जिनमें सुकून भरी हर शाम होती थी,

तलाशते है उन बातों को..


..जहाँ सजावटी शब्दों का मायाजाल न हो,

तलाशते है उन जज्बातों को..

..जहाँ चेहरों पे चेहरा सरेआम न हो,


होती हो जहाँ शाम उन खूबसूरत बागानों में,

आओ तलाशें वो लम्हें फिर..

..उन तारों भरे आसमानों में।।।


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