STORYMIRROR

Dhanjibhai gadhiya "murali"

Romance Tragedy Thriller

4  

Dhanjibhai gadhiya "murali"

Romance Tragedy Thriller

चली गई

चली गई

1 min
11

नज़र से नज़र मिलाने को बेताब था मैं,

लेकिन वह अपना मुंह मोड़कर चली गई।


इशारों की बात करने को बेताब था मैं,

लेकिन वह रेत की तरह सरकती चली गई।


धड़कन का ताल मिलाने को बेताब था मैं,

लेकिन वह मेरा दिल तोड़कर चली गई।


इश्क की बसंत महकाने को बेताब था मैं,

लेकिन वह जीवन पतझड़ बनाकर चली गई।


इश्क की अमीरात बसाने को बेताब था मैं,

लेकिन वह मुझे शोक में डुबाकर चली गई।


रुह से रुह मिलाने के लिये बेताब था "मुरली",

लेकिन वह दिल में नफ़रत जगाकर चली गई।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance