STORYMIRROR

मिली साहा

Romance

4  

मिली साहा

Romance

अब लौट भी आओ तो क्या

अब लौट भी आओ तो क्या

1 min
265

अब लौट भी आओ तो क्या लौट कहांँ पाएंगे फिर वही एहसास।

जिस दिन छोड गए थे उसी दिन ख़त्म हो गए दिल के जज़्बात।।


उम्मीद तुमसे लगा बैठे हम बेहिसाब शायद यही भूल थी हमारी।

जब जाना ही था छोड़कर क्यों आए ज़िंदगी में क्यों थाना हाथ।।


कितनी कसमें दीं तुम्हें कितनी पुकार लगाई हमने, लौट आओ।

तुमने तो मुड़कर भी ना देखा और ना सुनी हमारे दिल की बात।।


अब समझा चुके हैं हम खुद को सीख लिया तुम्हारे बिन जीना।

प्यार पर अब न रहा विश्वास तुमने जो दी बेवफ़ाई की सौगात।।


तुम लौट भी आओ गर फिर वही मोहब्बत ना कर पाएंँगे हम।

दिल की दहलीज पर अब आती नहीं बहारें ना होती बरसात।।


गिला नहीं कोई हमें मयस्सर हों तुम्हें दुनिया की तमाम खुशियांँ।

पर वक्त इतना गुज़र चुका है कि चाहते नहीं फिर हो मुलाकात।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance