STORYMIRROR

Rakesh Kushwaha Rahi

Romance

4  

Rakesh Kushwaha Rahi

Romance

क्यों नम है ये आँखें तुम्हारी

क्यों नम है ये आँखें तुम्हारी

1 min
385

क्यों नम हैं ये आँखें तुम्हारी

जो बन गयी हैं ये रातें हमारी

कुछ देर देखो पलकें उठाकर

कमल सी खिलेगी ये आँखे तुम्हारी।


गम का बोझ यूँ ही ढोते रहोगे

ताउम्र छुपकर यूँ ही रोते रहोगे

क्या शिकायत है हमसे तुम्हारी 

हर खुशी सोचने में यूँ ही खोते रहोगे।


फूलों को देखो जरा खिलते हुए

लोगों को परखो जरा मिलते हुए

जिन्दगी रास आएगी तुमको भी

कभी नदी को देखो मिलकर मिटते हुए।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance