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shekhar kharadi

Romance

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shekhar kharadi

Romance

चक्षु

चक्षु

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चक्षु खोलूं तो

तुम ओझल हो जाते

चक्षु बंद करूं तो

तुम प्रगट हो जाते

ऐ कैसा स्वपनिल दृश्य

हृदय से विपरीत ,

रक्त से शिथिल

अहसास से बढ़कर

क्षणभर श्वास में मिले ।


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