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Laxmi Tyagi

Romance Tragedy Others

4  

Laxmi Tyagi

Romance Tragedy Others

चिट्ठियाँ

चिट्ठियाँ

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न जाने कब, कैसे लिखती होगी ?वह चिट्ठियाँ !


माना कि मैं उससे दूर, कैसे सहती होगी दूरियां!


डुबो देती होगी, वो अपनी कलम में, मजबूरियां!


हृदय के भावों को सहेजती, लिखती होगी चिट्ठियां !


इसका एक-एक मोती मेरे लिए अनमोल है। 


ढूंढती होगी ,कभी यहां -वहां मुझे न पाने पर,


डूब जाती होंगी, मेरी याद में उसकी अँखिया !


कागज पर सोच मुझे, लिखती होगी ,चिट्ठियां !



इक दूजे से दूर हम, हृदय खोलकर रख देती होगी, 


करीब होने का अहसास देतीं ,लिखती जब चिट्ठियां !


मुझको, अपने पास पाती, मुझे रुलाती हैं , चिट्ठियां !


सामने तो लड़ती हो ,फिर लिखती हो चिट्ठियाँ !



मिले आज, दिन हुए बहुत, भावों को सहेजे हुए 


आओ ! आज मिलकर दोनों पढ़ते हैं , चिट्ठियां !


दूर चले जाने पर, साथ निभाती हैं, यही चिट्ठियां !


खोल रख देतीं, हृदय के भाव अनमोल ये चिट्ठियां !



उसके आने पर , महकी सी बयार लगती है। 


धड़कने बढ़ जातीं ,पढ़ने को आतुर लगती हैं। 


 बंद लिफ़ाफे में ,न जाने कितने अनमोल मोती !


बिन बोले ही ,कितना कुछ कह जाती हैं ?चिट्ठियां !


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