STORYMIRROR

Vaibhav Dubey

Romance

3  

Vaibhav Dubey

Romance

छंद(स्वाभिमान)

छंद(स्वाभिमान)

1 min
243

नैनों में कटार लिए पैनी पैनी धार लिए

कर के श्रृंगार मेरे यार चले आये हो

अधरों पर मुस्कान थोड़ा अभिमान लिए

करने दिलों पे अधिकार चले आये हो

कितना भी कर लो प्रयास टूटे मोहपाश

क्यों मेरे पास यार बेकार चले आये हो

रूप का दिखावा छोड़ो तुम्हें अपनाउँ तब

भर के हृदय में बोलो प्यार चले आये हो


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance