छंद(स्वाभिमान)
छंद(स्वाभिमान)
नैनों में कटार लिए पैनी पैनी धार लिए
कर के श्रृंगार मेरे यार चले आये हो
अधरों पर मुस्कान थोड़ा अभिमान लिए
करने दिलों पे अधिकार चले आये हो
कितना भी कर लो प्रयास टूटे मोहपाश
क्यों मेरे पास यार बेकार चले आये हो
रूप का दिखावा छोड़ो तुम्हें अपनाउँ तब
भर के हृदय में बोलो प्यार चले आये हो

