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Kunda Shamkuwar

Abstract Tragedy Others

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Kunda Shamkuwar

Abstract Tragedy Others

चौखट पार की दुनिया

चौखट पार की दुनिया

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चौखट पार की                        

बाहरी  दुनिया को             

जब तब  वह  

चौखट से ही झाँकती है


स्कूल में टीचर कहती थी

सारा आकाश तुम्हारा है

कितने अर्से तक

वह इसे सच मानती रही


क्या सच मे आसमाँ 

हर किसी का होता है?

शायद होता भी होगा

लेकिन उसका नहीं है


उस चौखट में आसमाँ को

अंदर आने की मनाही है 

लेकिन धूप का एक टुकड़ा

बड़ी ढिठाई से अंदर आता है

 

मई की जर्द दोपहर में

धूप के टुकड़े को देख 

चौखट से चौखट तक

वह हँसती रहती है


कभी उसका मन करता है 

खुद ही आकाश बन जाये

सूरज का कोना पकड़कर

सारी धूप को अंदर ले आएँ.....


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