STORYMIRROR

Sonam Kewat

Romance Tragedy Fantasy

4  

Sonam Kewat

Romance Tragedy Fantasy

चार दिनों का किस्सा

चार दिनों का किस्सा

1 min
204

तुम जब भी रूठते हो मैं मनाती हूं 

तुम्हारा मन हो तो रूठ जाया करो 

रूठती तो मैं भी बहुत हूँ बस

कभी तुम भी तो मुझे मनाया करो


मैं तो सारा घर संभालती हूं 

तुम बस वक्त पर घर आया करो 

दिन भर की थकान मिट जाएगी 

बस थोड़ा सा ही प्यार जताया करो 


अरे कमाते रहते हो नाम दुनिया में 

कभी काम मेरे भी आया करो 

जन्मदिन का नहीं तो ना सही 

कम से कम हमारी सालगिरह पर 

तो कोई तोहफा लाया करो


कुछ बातें बिन कहे भी सुन लो

कभी फुर्सत में अपनी सुनाया करो

मैं अगर नहीं समझती तो क्या 

तुम खुद ब खुद समझ जाया करो 


दौलत तो जिंदगी के लिए है

लेकिन प्यार जीने का हिस्सा है 

जीने दो कुछ पल तुम्हारे साथ 

आखिर यही चार दिनों का किस्सा है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance