Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Hoshiar Singh Yadav Writer

Abstract

3  

Hoshiar Singh Yadav Writer

Abstract

चांद बैरी

चांद बैरी

1 min
331


चांद

चमक रहा नभ पर

बुलाता अपने पास

कभी धरा पर आए

पूरी हो जाए आस,

तारों के बीच रहता

शोभा ही निराली है

जिस रात नहीं आए

वो रात ही काली हैं,

स्वर्ग सा लगता मुझे

चांद तारे का परिवार

एकता भारी मिलती

कभी होगी नहीं हार,

मामा कहकर पुकारे

धरती के सब लाल

तेरी महिमा निराली

रहते खुश हर हाल।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract