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Dr.rajmati Surana

Classics

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Dr.rajmati Surana

Classics

बुढ़ापा बना मुस्कान

बुढ़ापा बना मुस्कान

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बुढ़ापा बना मुस्कान मेरी जिंदगी का

मैं खुशियाँ समेट रहा हूँ,

जिदंगी के हसीन पलों को मैं ख़ूबसूरत इंतजाम कर रहा हूँ ।


कुछ पत्ते शाखों पर अब भी

जवान हो हवाओं में उड रहे हैं,

उम्र ए रफ्ता की बची हुई शामो को खुद से खुद में खो मज़े कर रहा हूँ ।


दर्द है बहुत दिल में मेरे पर जिदंगी इतनी उदास भी नहीं हैं मेरी,

खुदा की बंदगी में वक्त गुजार हर लम्हा नई ग़ज़ल लिख रहा हूँ ।


उम्र की कर ऐसी तैसी कर सारी चिंताएँ को आसमान की खूँटी पर टांग,

खुलकर हंसते हुए मीठी मीठी मुस्कान बिखेर आनन्दित हो रहा हूँ ।


सफ़र छूटता जा रहा है वक्त की सूइयों संग ढलता जा रहा है,

रेत सी फिसलती जिदंगी को ज़िंदादिली से मुस्कराते हुए जी रहा हूँ ।।




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