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Preeti Sharma "ASEEM"

Drama

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Preeti Sharma "ASEEM"

Drama

बसंत

बसंत

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फूलों की खिल- खिलाहट को,

सर -सराती हवा में,

खुशबू तुम घोल जाओ।


 बसंत तुम आकर,

अनंत रूप जीवन में,

जीवन को बहारों के 

दिगंत तक ले जाओ।


फूलों की खिल- खिलाहट को,

सर- सराती हवा में,

खुशबू तुम घोल जाओ ।


मन -मन को महका जाओ ।

रूह को जीवन दे,

नई राह तुम दिखलाओ ।


बसंत तुम आकर,

अनंत रूप जीवन में,

जीवन को बहारों के, 

दिगंत तक ले जाओ ।


फूलों की खिल- खिलाहट को, 

 सर- सराती हवा में,

खुशबू सा तुम घोल जाओ।


चांदनी रात में आ के,

मोगरे के फूल- सी,

खुशबू बन,

 प्यार को महकाओ।


बसंत तुम आकर,

अनंत प्रेम रूप,

आनंद के दिगंत तक ले जाओ।


विशेष यहां दिगंत का अर्थ क्षितिज 


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