STORYMIRROR

श्रेया जोशी 'कल्याणी'

Tragedy Others

4  

श्रेया जोशी 'कल्याणी'

Tragedy Others

बोझिल मन

बोझिल मन

1 min
12

लो फिर एक बार सात अक्टूबर आई,

सारी घटना किसी चलचित्र सी,

मात-पिता की आँखों में आई,

आज ही के दिन जब तुमने पहली बार दुनिया देखी विरल भाई।


आज के दिन तुम्हारी अनुपस्थिति ने,

सब की आँखें भिगाई,

मेरी तो हो गई मेरे नाथ से जमकर लड़ाई,

काहे को असमय तुम्हें आवाज लगाई।


होते जो तुम साथ तो सब देते खूब बधाई,

मैं भी एक प्यारा सा बधाई गीत लिख भेजती मेरे भाई,

कहे 'कल्याणी' बोझिल मन और कांपते हाथ से यह कविता ना लिखनी पड़ती मेरे भाई ।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy