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Lakshman Jha

Inspirational

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Lakshman Jha

Inspirational

बंधन अपनों का

बंधन अपनों का

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लाख मुख फेर लो,

रिश्ते को तोड़ लो,

पर नहीं टूटेगा

जन्मों का बंधन !

धारा को मोढ़ लो,

गति को समेट लो,

फिर भी तोड देती,

सरिता सब बंधन !

उसे भी एहसास है ,

सागर में ही बास है,

कब तक करेंगे हम

शिखरों पर क्रंदन !

पेड़ो की छांव में,

अपने ही गाँव में

मिलती है राहत

ममता के बाहों में!!



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