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Nikki Sahu

Crime

4.4  

Nikki Sahu

Crime

बलात्कार

बलात्कार

1 min
447


दरिंदों का समाज है

मानवता शर्मसार है

जहाँ पूजते देवियों को

वहाँ बेटियाँ बेहाल है


खिलखिलाती किलकारियाँ

चीख में तब्दील है।

जो नोंचते शरीर को

उनकी आत्मा मलीन है


काट कर के अंग अंग उसके

जानवरों को डाल दो।

या उसे झोंक दो अंगारों में,

जो बलात्कारी आजाद है।


मेरी आत्मा की गुहार है।

मेरी रूह की पुकार है

उसे झोंक दो अंगारों में

जो बलात्कारी आजाद है।


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