STORYMIRROR

Krishna Sinha

Tragedy

4  

Krishna Sinha

Tragedy

बिखरते परिवार

बिखरते परिवार

1 min
299

पाश्चात्य संस्कृति का कर अंधानुकरण,

भूले हम रिश्तो की महत्ता,

मै, मेरी बीवी बच्चे,

हुआ परिवार,

बोझ हो गए माता पिता, भाई भाई के बीच उठी दिवार,

रिश्ते हुए तार तार,

बिखर गया बरसो से सहेजा,

टूटा भरा पूरा परिवार।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy