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Himanshu Sharma

Abstract

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Himanshu Sharma

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भूख से है

भूख से है

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इन आँखों की उदासी,

और थकान भूख से है !

पैसा, रूतबा, शोहरत,

और जहान भूख से है !


पैदल चल दिए गाँव ये,

समेटा सामान भूख से है !

लील ली नौकरी रोग ने,

तो ये प्रयाण भूख से है !


कट गए वो पटरियों पे,

चली गई जान भूख से है !

चप्पलों के बिना ही चले,

तो ये एहसान भूख से है !


पैसा भी हो गया कमतर,

भोजन महान भूख से है !

भूख नहीं इंसान के कारण,

बल्कि इंसान भूख से है !


तुम गरीब रह गए रोटी से,

वो तो धनवान भूख से है !

वो डालते हैं छत महलों पे,

उनपे आसमान भूख से है !


पैसा का ज़ोर नहीं है अब,

गरीब का ईमान भूख से है !

न गर्मी, न वर्षा, न सर्दी, टूटा,

मौसम का गुमान भूख से है !


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