भूख से है
भूख से है
इन आँखों की उदासी,
और थकान भूख से है !
पैसा, रूतबा, शोहरत,
और जहान भूख से है !
पैदल चल दिए गाँव ये,
समेटा सामान भूख से है !
लील ली नौकरी रोग ने,
तो ये प्रयाण भूख से है !
कट गए वो पटरियों पे,
चली गई जान भूख से है !
चप्पलों के बिना ही चले,
तो ये एहसान भूख से है !
पैसा भी हो गया कमतर,
भोजन महान भूख से है !
भूख नहीं इंसान के कारण,
बल्कि इंसान भूख से है !
तुम गरीब रह गए रोटी से,
वो तो धनवान भूख से है !
वो डालते हैं छत महलों पे,
उनपे आसमान भूख से है !
पैसा का ज़ोर नहीं है अब,
गरीब का ईमान भूख से है !
न गर्मी, न वर्षा, न सर्दी, टूटा,
मौसम का गुमान भूख से है !
