STORYMIRROR

Neeraj pal

Abstract

4  

Neeraj pal

Abstract

तुम्ही मेरी दौलत।

तुम्ही मेरी दौलत।

1 min
296

तुम ही मेरी दौलत, तुम ही मेरी शोहरत,

 तुम ही स्वामिनी हो, तुम ही स्वामिनी हो....2

 कोई आ करके मेरे दिल से तो पूछे

 कि तुम ही धड़कन हो, कि तुम ही धड़कन हो।

 तुम ही मेरी दौलत.........


 जहॉं भी जाता हूँ तुम्हें ही पाता हूँ

 ना जाने फिर भी तुम कहाँ छुपी हो.....2

 मेरी दशा देखकर ज़रा तरस तो खाओ

 न जाने क्यों मुझसे इतनी जुदा हो।

 तुम ही मेरी दौलत.......


 तुम ही मेरे जीवन की अधूरी किताब हो

 कोरा कागज मैं, तुम मेरी कलम हो......2

 मैं हूँ तुम्हारे जीवन का साथी

 तुम ही मेरी प्रियतम, प्राण भी तुम्ही हो।

 तुम ही मेरी दौलत.........


 बहुत दिन बीते, अब तो आ जाओ

 तड़पता है दिल मेरा, सीने से लगाओ......2

 तुम्हें पाकर के, यह डर लग रहा है

 जैसे कोई तुमसे, अलग कर रहा है। 

तुम ही मेरी दौलत.........


गाने के बोल.....तुम ही मेरे मनिदर।

फिल्म...खानदान।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract