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Ashfia Parvin

Abstract

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Ashfia Parvin

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भरोसा मत करो मुझ पर

भरोसा मत करो मुझ पर

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भरोसा मत करो मुझ पर

क्यूँकि मुझे खुद पे ही भरोसा नहीं है

करना तो है बहुत कुछ

पर विश्वास नहीं खुद पर

जब खुद पर विश्वास नहीं

तो आप लोग भरोसा कैसे कर सकते हो?

भरोसा मत करो मुझ पर।


भरोसा मत करो मुझ पर

क्यूँकि मुझे खुद पे ही भरोसा नहीं है

मैं मतलबी हूँ थोड़ा

दुनिया के हिसाब से हम कहानी या कविताएं नहीं लिखते

अपने दिल से जो भी आता है, वो लिख डालते है

दुनिया के हिसाब से हम चल नहीं पाते, अपने में ही मस्त है

भरोसा मत करो मुझ पर


भरोसा मत करो मुझ पर

क्यूँकि मुझे खुद पे ही भरोसा नहीं है

मन तो है परिंदा बन के उड़ने को नहीं

बल्कि आसमान बनना है

सूरज के जैसे चमकना भी है

पर भरोसा नहीं मुझे खुद पर 

भरोसा मत करो मुझ पर।



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