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Suresh Koundal

Abstract Tragedy


4.5  

Suresh Koundal

Abstract Tragedy


भरी उड़ारियाँ, कूंजां आईयाँ

भरी उड़ारियाँ, कूंजां आईयाँ

1 min 201 1 min 201

आया सियाला.. भरी उड़ारियाँ,

दूर देसां तों "कूंजां" आईयाँ।

अपणे अपणे छडी करी आलणे

पौंगां दियां "परौणियाँ " आईयाँ।।


समुंदर, झरने, कन्ने पहाड़,

रेगिस्तान लंग्गे मील हज़ार।

रंग बिरंगे फंग फड़फडाइने,

बिन थकेयो इन्ना करी ने पार।

नोएँ सुपणे सजाणा आईयाँ ,

अपणी नस्ल बधाणा आईयाँ।

ना कोई बन्ना, ना कोई बन्नण,

"बसुधैव कटुम्भकम" दा मतलब,

सबना जो समझाणा आईयाँ।

आया सियाला भरी उड़ारियाँ

दूर देसां तों " कूंजां "आईयाँ ।।


हिमाचला री धरती होई जांदी गुलज़ार

करी ने इनां फ़रिश्तेयाँ दा दीदार

बणा रा मैकमा रेहन्दा तैयार

करने जो इन्ना री सुरखेया सत्कार 

पौंगाँ रियाँ रौंणकां बधाणा आईयाँ 

सुंदरता बिखराणा आईयाँ 

आया सियाला भरी उड़ारियाँ

दूर देसां तों " कूंजां "आईयाँ।।


पर इस बरी समत कदेहा चड़ेया 

दुनिया जो था करोने नरढ़ेया।

इना परौणे पखेरुआं जो भी, 

"बर्ड फ्लुएं" लेयी जकड़ेया।

उड़ारियाँ जो लगी गेया विराम,

इन्ना बीमारिया ऐसा पकड़ेया ।

किरी किरी ने सै पौणा लग्गियाँ

जानू ने सै हथ्थ धोणा लग्गियाँ

कन्ने छोहत इहो देई लग्गी 

होर नसलां भी फंसणा लग्गियां।

आया सियाला भरी उड़ारियाँ

दूर देसां तों " कूंजां " आईयाँ।


हर पास्से मच्ची गई हाहाकार

बेई गया "बर्ड फ्लू" पैर पसार 

मरी गइयाँ कूंजां कई हज़ार

कुसि जो समझिए इसदा जिम्मेदार

अपनी जान गवाणा आईयाँ

हिमाचले जो रुआणा आईयाँ

आया सियाला भरी उड़ारियाँ

दूर देसां तों " कूंजां "आईयाँ 

अपणे अपणे छडी करी आलणे

पौंगां दियां "परौणियाँ " आईयाँ।।


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