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Dr. Madhukar Rao Larokar

Fantasy

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Dr. Madhukar Rao Larokar

Fantasy

भोर का सपना

भोर का सपना

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आसमान का, भ्रमण कर रहा

मन मयुरा निद्रा, में हर पल।

खुली छत सा, आसमान

बिंदास स्वप्न का यह पल।।


हल्का फुल्का सा, लागे बिछौना

कहीं सिर है, कहीं पर तकिया

पादुका भी कहीं, उड़ रही

लैम्प ने पकड़ा, अपना कोना।।


उम्र है, अवसर है, अंगड़ाई भी

खुले गगन का है, दिलकश साथ।

ना चिंता ना कोई, बेचैनी

मीठी निद्रा में यह, सपने का साथ।।


सपना है या है हकीक़त

बंद आंखों में, सजन है बिराजे।

मन की रफ्तार है, गति से तेज़

कानों में मधुर, संगीत सा बाजे।।


काश आँखें बंद, रहे यूँ ही

सपने का साथ, ना कभी छूटे।

नवयौवना के मन, की चाह हो पूरी

सपना भोर का हो, और सत्य बने।।



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