STORYMIRROR

संदीप सिंधवाल

Classics Inspirational

4  

संदीप सिंधवाल

Classics Inspirational

भारती की जय कहना होगा

भारती की जय कहना होगा

1 min
32

कुछ बुलंदियों को अपनी हद में रहना होगा

यहीं रह कर भारती की जय कहना होगा


यहीं पैदा हुए प्यारी धरती से 

फिर उसी मिट्टी से नफ़रत कैसी

ईश्वर अल्लाह जब एक ही तो

फिर ये धर्म से बनी शरहद कैसी

अपने वतन के खातिर मिल कर बढ़ना होगा

यहीं रह कर भारती की जय कहना होगा


एक तिरंगा एक गान प्रतीक

एक प्रकृति की बहे जल धारा

वही वनस्पति एक जीव जंतु

एक ही सृष्टि का संसार सारा

एक जैसे बने है तो हमें एक ही रहना होगा

यहीं रह कर भारती की जय कहना होगा


हर किसी के विचार आजाद 

स्वतंत्र हैं सबकी अभिव्यक्ति

एक भारत और श्रेष्ठ भारत 

सब धर्मों की एक देश भक्ति

इसी भक्ति और आस्था का मान रखना होगा

यहीं रह कर भारती की जय कहना होगा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics