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संदीप सिंधवाल

Classics Inspirational


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संदीप सिंधवाल

Classics Inspirational


भारती की जय कहना होगा

भारती की जय कहना होगा

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कुछ बुलंदियों को अपनी हद में रहना होगा

यहीं रह कर भारती की जय कहना होगा


यहीं पैदा हुए प्यारी धरती से 

फिर उसी मिट्टी से नफ़रत कैसी

ईश्वर अल्लाह जब एक ही तो

फिर ये धर्म से बनी शरहद कैसी

अपने वतन के खातिर मिल कर बढ़ना होगा

यहीं रह कर भारती की जय कहना होगा


एक तिरंगा एक गान प्रतीक

एक प्रकृति की बहे जल धारा

वही वनस्पति एक जीव जंतु

एक ही सृष्टि का संसार सारा

एक जैसे बने है तो हमें एक ही रहना होगा

यहीं रह कर भारती की जय कहना होगा


हर किसी के विचार आजाद 

स्वतंत्र हैं सबकी अभिव्यक्ति

एक भारत और श्रेष्ठ भारत 

सब धर्मों की एक देश भक्ति

इसी भक्ति और आस्था का मान रखना होगा

यहीं रह कर भारती की जय कहना होगा।


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