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GUDDU MUNERI "Sikandrabadi"

Abstract

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GUDDU MUNERI "Sikandrabadi"

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भारत हिन्दोस्तां वतन इंडिया

भारत हिन्दोस्तां वतन इंडिया

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एक देश को सोने की चिड़िया

और सोने की चिड़िया को भारत

फ़िर भारत को हिंदोस्तां-वतन-

और इंडिया लिखकर

कागज पर पहचान बनाकर

क्या खूब लिखते है लिखने वाले


सोने की चिड़िया वाली नहर

और भारत वाली नदियां 

वो हिन्दोस्तां की ठंडी-गर्म हवाएं 

वो इंडिया वाली एयर 


जमीं एक है हवा एक है 

पानी की वो लहर एक है 

कागज पर पहचान बनाकर

क्या खुब लिखते है लिखने वाले।


वो शायर की शैर-ओ-शायरी

वो कविताओ की चार पंक्ति 

दुआओ पर उठते हाथ 

हाथ जोड़ होती प्राथना

प्रे करुँ या अरदास 

भगवान हो या अल्लाह 


रब मिले या गोड 

वो देने वाला एक है 

वो उपर वाला एक है 

कागज पर पहचान बनाकर

क्या खूब लिखते है लिखने वाले,


कोई दिल्ली में बसा है 

कोई महाराष्ट्र में बसा

कोई बसा है तमिल नाडू 

कोई उत्तर प्रदेश में बसा

 

उत्तर से कोई दक्षिण में जाए

पुरब से पश्चिम मे जाए 

इंसाँ एक जुबान एक 

भारत एक देश एक फ़िर भी 

कागज पर पहचान बनाकर

क्या खूब लिखते हैं लिखने वाले।


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