बेवफाई के आँसू
बेवफाई के आँसू
तेरी बेवफाई के आँसू
मेरी आँखों से बरसे
और तेरे द्वेष-क्लेश की गर्मी से
भाप बन उड़ गए ।
गगन में जा बादल बन गए
दर्द भरे बादल गरजने लगे।
बरखा बन बरसने लगे ।
सब का दामन भिगोने लगे ।
तेरी बेवफाई की कहानी कहने लगे ।
और मेरी वफा तेरे चक्षुओं से
अश्रु बन बारिश संग बहने लगे ।
तब शायद एक क्षण के लिए
तुझे मेरी कमी महसूस होने लगे।
और मेरे प्यार की गहराई
तेरी खिड़की पर पड़ी बूँदें बयां करने लगे।
बूँदों की टप-टप धीरे-धीरे
तेरी-मेरी कहानी तुझे सुनाने लगे ।
और तेरे नयनों की नमी
तेरी बेरुखी बयां करने लगे ।
तब भी मेरे लोचन
तेरे लोचनों की नमी से नम होगें
क्योंकि ये वो प्रेम है
जो होठों से बयां नहीं होता
बस बरसात की बूंदों-सा बहने लगे ।

